सबसे पहले बैंक/लेंडर से लिखित में मांगें
Field executive ने जो % मौखिक रूप से बताया है, उस पर अकेले भरोसा न करें। लोन की आधिकारिक शर्तें लिखित में मांगें।
वास्तव में मिली रकम, काटे या अलग से दिए गए शुल्क और हर किस्त की सही तारीख व राशि दर्ज करें। कैलकुलेटर केवल सामान्य मासिक EMI नहीं मानता, बल्कि आपके वास्तविक cash flow पर गणना करता है।
अपना लोन कैलकुलेट करें →जो जानकारी पता है वही भरें। बाद में किसी भी किस्त को बदला जा सकता है।
यह प्रतिशत उस रकम और उन तारीखों व राशियों से बनता है जो आपने वास्तव में दर्ज की हैं।
लिखित रिकॉर्ड होने से गलत या अस्पष्ट लोन जानकारी पर सवाल करना आसान होता है।
Field executive ने जो % मौखिक रूप से बताया है, उस पर अकेले भरोसा न करें। लोन की आधिकारिक शर्तें लिखित में मांगें।
Sanction/KFS, रसीद, repayment schedule और यह calculation लगाएँ। Complaint/reference number और लिखित जवाब मांगें।
अगर regulated entity 30 दिनों में जवाब नहीं देती या जवाब से संतुष्ट नहीं हैं, तो RBI के current Integrated Ombudsman Scheme के तहत Complaint Management System का उपयोग कर सकते हैं।
National Consumer Helpline pre-litigation शिकायत सहायता देता है: portal, 1915 / 1800-11-4000 और WhatsApp 8800001915 के माध्यम से।
3 महीने बाद दिया गया ₹70,000 और 9 महीने बाद दिया गया ₹70,000 एक जैसा cash flow नहीं है।
लोन मिलने से पहले कोई रकम कटती है तो आपके हाथ में आई वास्तविक रकम स्वीकृत रकम से कम होती है।
आप अलग-अलग किस्तें, अलग तारीखें, अलग शुल्क और असली लोन की बाकी जानकारी डाल सकते हैं।